पटना के "रंगबाज थानेदार" बोले- “जहां शिकायत करनी है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता”

पटना पुलिस के एक “रंगबाज थानेदार” फिर सुर्खियों में हैं। फिर चर्चा में हैं। कहते हैं कि इनको चर्चा में बने रहेने की आदत है। “रंगबाज थानेदार” ने इस बार जो किया है वह उनके लिए नया नहीं है, उनका दावा उनके सेवा काल में ऐसे गंभीर आरोप लगते रहे है। इन्हें इनकी इसी आदत की वजह से सस्पेंशन का खिताब भी मिल चूका है। कई बार तो इनका तबादला भी किया गया मगर बावजूद इसके इनकी रंगबाजी का रवैया नहीं बदला।

पटना के "रंगबाज थानेदार" बोले-  “जहां शिकायत करनी है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता”
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पटना पुलिस के एक “रंगबाज थानेदार” फिर सुर्खियों में हैं। फिर चर्चा में हैं। कहते हैं कि इनको चर्चा में बने रहेने की आदत है। “रंगबाज थानेदार” ने इस बार जो किया है वह उनके लिए नया नहीं है, उनका दावा उनके सेवा काल में ऐसे गंभीर आरोप लगते रहे है। इन्हें इनकी इसी आदत की वजह से सस्पेंशन का खिताब भी मिल चूका है। कई बार तो इनका तबादला भी किया गया मगर बावजूद इसके इनकी रंगबाजी का रवैया नहीं बदला।

शौकीन मिजाज के थानेदार ने अब पत्रकार के साथ बदसलूकी भी करने लगे हैं। राजधानी पटना जिले में तैनात थानेदार खुशरुपुर थाना में पदस्थापना के दौरान भी आरोपों से घिरे रहे हैं। वहीं गुरु पर्व के दौरान चौक थाना क्षेत्र में एक विदेशी महिला के साथ लूटपाट और चाकूबाजी की घटना हुई थी, जिसमें कर्तव्य में लापरवाही को लेकर उन्हें सस्पेंड भी किया गया था।

लेकिन सस्पेंशन के बाद भी कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। उन्हें एक थाने से दूसरे थाने में ट्रांसफर कर दिया गया और फिलहाल इन्हें पटना के पूर्वी इलाके से पश्चिम इलाके के एक थाने में प्रभारी बनाया गया है।  यहां से भी लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ दलाल थाने के अंदर बैठकर केस मैनेज करते हैं, और पैसे का लेन-देन होता है।

इन्हीं शिकायतों की पड़ताल करने जब NBC24 के रिपोर्टर पश्चिमी एसपी ऑफिस पहुंचे। जहां इनकी चर्चा हुई। आरोप है कि सवाल पूछे जाने पर थानेदार आग बबूला हो गए और पत्रकार के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे। इतना ही नहीं, जैसे ही पत्रकार ने वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू करने की कोशिश की, थानेदार ने उसका मोबाइल छीन लिया और खुलेआम यह कहते नजर आए कि —“जहां शिकायत करनी है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतने आरोपों के बावजूद ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या सिर्फ तबादला ही कार्रवाई है? और क्या पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं? पटना से क्राईम रिपोर्ट अजय शर्मा की रिपोर्ट।